संत रविदास जी का जीवन परिचय
जन्म: माघ पूर्णिमा, 1376 ई. (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
पिता: संतोख दास
माता: कर्मा देवी
व्यवसाय: जूते बनाना
शिष्य: स्वामी रामानंद, संत कबीर, मीराबाई
निधन: 1540 ई. (वाराणसी)
जीवन दर्शन
संत रविदास जी ने जातिवाद, ऊंच-नीच की भावना और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने अपने पदों के माध्यम से समाज में समानता, भाईचारे और मानवता का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध पद "मन चंगा तो कठौती में गंगा" आज भी प्रचलित है, जिसका अर्थ है कि यदि मन शुद्ध है तो कहीं भी भगवान का अनुभव किया जा सकता है।
योगदान
संत रविदास जी के पद सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित हैं।
उन्होंने रैदासी पंथ की स्थापना की, जो आज भी उत्तर भारत में प्रचलित है।
उनकी शिक्षाएं आज भी अनुसूचित जाति समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।